आपके बिज़नेस में जी.एस.टी. क्यों हे जरुरी ?
यदि आप ऑनलाइन बिज़नेस की शुरुवात कर रहे हे या फिर आप अपने नए बिज़नेस की शुरुवात कर रहे हे, अधिकतर इन दोनों मामलो में ही ज्यादातर जी.एस.टी. को ले कर कन्फूजन होता हे या इसके अलावा और भी कोई वजह हो जिसमे जी.एस.टी. GST के बारे में होने वाले कन्फूशन आपके रास्ते में रुकावट बन रहे हे तो आपके सारे कन्फूजन का जवाब आपको हमारी वेबसाइट के माध्यम से मिल जायेगा, चुकी जी.एस.टी. एक बहुत बड़ा टॉपिक हे जो सिर्फ चंद शब्दों में कवर नहीं किया जा सकता इसलिए आपको हम यहाँ जितना हो सके उतना आसान शब्दों में अपने प्रयासों से समजाने की कोशिश करेंगे ताकि आप जी.एस.टी. की झंझट में उलझे बिना अपना काम सुचारु रूप से शुरू कर पाए। यहा विस्तार में आगे बढ़ने से पहले में आपसे यही कहूंगा की आपका ध्यान परिभाषा में उलझने से ज्यादा जी.एस.टी. के कांसेप्ट को समझने में होना चाहिए जितना ज्यादा आप कांसेप्ट को समझेंगे उतने ही ज्यादा आपके कन्फूशन दूर होते चले जाएंगे।
जी.एस.टी. क्या होता हे?
जी.एस.टी. शब्द एक अंग्रेजी शब्द का शार्ट फॉर्म हे हालांकि इसका हिंदी नाम भी हे, परन्तु जी.एस.टी. (GST) शब्द प्रचलन में ज्यादा हे इसलिए हम भी इसको आम भाषा के अनुसार ही समझेंगे। जी.एस.टी. का पूरा नाम अंग्रेजी में गुड्स एवं सर्विस टैक्स हे, हिंदी में जी.एस.टी. को कहा जाए तो वस्तु एवं सेवा कर।
अब जैसा की इसके नाम से ही पता चल रहा हे वस्तु यानि की कोई भी प्रोडक्ट एवं सर्विस यानि की कोई भी ऐसी सेवा जो आप दे रहे हो या देना चाहते हो उसपे लगने वाला कर, और कर को अंग्रेजी में कहा जाता हे टैक्स। अर्थात या तो आप कोई प्रोडक्ट बेच रहे हे या फिर आप कोई सर्विस दे रहे हे या फिर दोनों ही कर रहे हे उसमे आपको वस्तु एवं सर्विस पर लगने वाला टैक्स देना होगा। और इसी टैक्स को जी.एस.टी. (GST) कहा जाता हे।
जी.एस.टी. टैक्स व्यापारी को सरकार को देना होता है, जिसमें केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार दोनों शामिल होती हैं। जी.एस.टी. टैक्स का यह निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि वस्तु या सेवा की सप्लाई एक ही राज्य के अंदर हो रही है या दो अलग-अलग राज्यों के बीच।
यदि जी.एस.टी. लेने और देने वाले दोनों व्यक्ति एक ही राज्य में हैं, तो इसे इंट्रा स्टेट सप्लाई (Intra-State Supply) कहा जाता है, जिसमें GST दो भागों में बंटता है – CGST (केंद्र सरकार) एवं SGST (राज्य सरकार)। वहीं यदि जी.एस.टी. लेने और देने वाले व्यक्ति अलग-अलग राज्यों में हैं, तो इसे इंटर स्टेट सप्लाई (Inter-State Supply) कहा जाता है, जिसमें IGST लगाया जाता है। यह टैक्स पहले केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किया जाता है और बाद में नियमों के अनुसार संबंधित राज्यों के साथ समायोजित किया जाता है। इससे हमें 3 महत्वपूर्ण शब्दों का पता चलता हे और जी.एस.टी. की पूरी कहानी इन तीन शब्दों के आस पास ही गुमेगी इसलिए आपको इन तीन शब्दों को अच्छे से जानना जरुरी।
1. CGST (Central GST) - जब प्रोडक्ट लेने और देने वाले दोनों एक ही राज्य के अंदर होते हे तो उस टैक्स में से केंद्र सरकार का हिस्सा CGST (Central GST) नाम से दर्शाया जाता हे।
2. SGST (State GST) - जब प्रोडक्ट लेने और देने वाले दोनों एक ही राज्य के अंदर होते हे तो उस टैक्स में से राज्य सरकार को जाने वाला हिस्सा SGST (State GST) नाम से दर्शाया जाता हे।
3. IGST (Integrated GST) - जब प्रोडक्ट लेने और देने वाले दोनों अलग अलग राज्यों से होते हे तो उस टैक्स को केंद्र सरकार के पास IGST (Integrated GST) नाम से दर्शाया जाता हे। दोनों राज्यों को अपने अपने हिस्से का टैक्स देने का काम यहाँ केंद्र सरकार का होता हे, इसलिए आपको इसमें ज्यादा नहीं उलझते हुए बस दिए गए शब्दों को ही याद रखना हे।
इसके अलावा शब्दों की ही बात करे तो एक शब्द UTGST (Union Territory GST) भी होता हे जो की केंद्र शाषित प्रदेशो में लाघु होता हे जैसे अंडमान एवं निकोबार, लक्षद्वीप आदि जगहों पर। इन्ही सारे शब्दों को जी.एस.टी. के प्रकार भी कहा जाता हे।
सामान्यत आपको ये शब्द कस्टमर के रूप में, यदि आप किसी व्यापारी से जी.एस.टी. बिल लेते हे तब आपके बिलो में देखने को मिलेंगे, और यदि आप खुद किसी कस्टमर के लिए जी.एस.टी. बिल बना रहे हे तो आपको भी इस तरह के शब्दो को अपने जी.एस.टी. बिल में लिखना आवश्यक होता हे, तभी यहाँ आपको इन शब्दों के बारे में जानकारी दी गयी हे।
यहाँ आपके लिए ये बात जानना जरुरी हे की जी.एस.टी. टैक्स एक इनडायरेक्ट टैक्स होता हे जिससे व्यापारी द्वारा जी.एस.टी. टैक्स का पैसा कस्टमर से ले कर सरकार तक पहुंचाया जाता हे, यानि की सरकार सीधा कस्टमर से टैक्स के पैसे न ले कर व्यापारी के माध्यम से टैक्स के पैसे लेती हे, क्युकी कस्टमर को वस्तु या सेवा का लाभ व्यापारी के माध्यम से ही मिलता हे। और जनता से लिए इन्ही पेसो का उपयोग सरकार जनता के ही विकास के कार्यो में करती हे, जिसमे जनता के देशी एवं विदेशी दोनों ही हित समाहित होते हे।
अब जब बात कस्टमर से जी.एस.टी. टैक्स के पैसे लेने की हो रही हे इस बात से आपको यहाँ ये भी क्लियर हो जाना चाहिए की सामान्यतः किसी व्यापारी को GST जमा करवाने के लिए अपनी जेब से, अलग से कोई पैसा नहीं लगाना पड़ता, क्योंकि GST का पैसा ग्राहक से प्राप्त किया जाता है। इसका मतलब व्यापरियों को जी.एस.टी. में रजिस्ट्रेशन करते वक़्त इस अफवाह से बचाना चाहिए की जी.एस.टी. का पैसा व्यापारी को अपनी जेब से भरना होगा व्यापारी को कस्टमर से जी.एस.टी. टैक्स के रूप में लिया पैसा जी.एस.टी. पोर्टल पर जी.एस.टी. रिटर्न के प्रोसेस के माध्यम से जमा करवाना होता हे।
यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य हे की व्यापारी को अपनी जेब से पैसा Interest, Late Fee या Penalty के तौर पर भरना पड़ सकता हे वो भी सिर्फ तब जब कोई व्यापारी जी.एस.टी. के नियमो का उलंघन करता हे या सरकार दी गयी एक निश्चित अवधि तक कस्टमर से लिया जी.एस.टी. टैक्स का पैसा जमा नहीं करवा देता, तब पेनल्टी लगती हे वरना नहीं, क्योकि जी.एस.टी. टैक्स एक जिम्मेदारी भी हे।
कोई व्यापारी अपनी इस जिम्मेदारी में विफल होता हे तो उसे गंभीर मामलों में या जानबूझकर GST नियमों का उल्लंघन करने पर उसके ऐसे कृत्य को Tax Evasion (कर चोरी) माना जा सकता है, जिसके लिए कानून में दंड का प्रावधान है। यदि आप समय पर GST Return दाखिल करते हैं और GST से जुड़े नियमों का पालन करते हैं, तो सामान्यतः किसी प्रकार की समस्या आपको नहीं आती। यहाँ इस बात का उद्देश्य आपको डराना नहीं सचेत करना हे की GST एक जिम्मेदारी हे और इसलिए आपको इस बात का ज्ञान होना आवश्यक हे।
वैसे इस फैक्ट में आपको एक और इंट्रेस्टिंग बात ये भी जान कर ख़ुशी होगी की यदि आपका बिज़नेस जी.एस.टी. रजिस्टर्ड हे और आप जिस व्यापारी से अपने बिज़नेस के लिए माल खरीद रहे हे उनसे जी.एस.टी. B2B इनवॉइस (बिल) मांग सकते हे इससे आपने जो अपने बिज़नेस के लिए माल ख़रीदा हे उसमे आपका जी.एस.टी. टैक्स में जो पैसा लगा हे उसे जी.एस.टी. पोर्टल के माध्यम से इनपुट क्रेडिट के प्रोसेस से प्राप्त कर सकते हे। यह सुविधा सिर्फ व्यापारियों तक सिमित हे और आपका ये पैसा आपको सीधे आपके बैंक खातों में न मिल कर जी.एस.टी. पोर्टल तक सिमित होगा जिसको जी.एस.टी. रिटर्न फाइल करते टाइम आपके द्वारा भरे जाने वाले जी.एस.टी. अमाउंट में एडजस्ट कर दिया जायेगा।
आसान शब्दों में इसे आप कह सकते हे की बिज़नेस परचेस पर व्यापारी को उनकी खरीद में दिया हुआ जी.एस.टी. टैक्स का पैसा उनके द्वारा भरे जाने वाले जी.एस.टी. टैक्स के पेसो में एडजस्ट कर दिया जाता हे। इसे जी.एस.टी. रजिस्ट्रेशन के बड़े फायदों में से एक बहुत बड़ा फायदा माना जाता हे।
GST किसे लेना चाहिए?
अधिकांश राज्यों में यदि आप कोई वस्तु बेच रहे हे और आपका वार्षिक टर्नओवर 40 लाख से अधिक हे या फिर आप कोई सर्विस दे रहे हे और आपका टर्नओवर 20 लाख से अधिक हे तब सामान्यतः आपको जी एस टी लेना अनिवार्य हो जाता हे। इसके अलावा यदि आप किसी ईकॉमर्स मार्केटप्लेस के माध्यम से भी अपने प्रोडक्ट बेचना चाहते हे तो आपके लिए जी.एस.टी. लेना जरुरी हो सकता हे क्योकि बिना जी.एस.टी. रजिस्ट्रेशन के अधिकतर मार्केटप्लेस प्लेटफार्म आपको सेलर के रूप में अपनी वेबसाइट पर रजिस्टर ही नहीं होने देंगे। हा परन्तु यदि आप अपनी खुद की वेबसाइट से प्रोडक्ट बेच रहे हे और आपका टर्न ओवर यहाँ लिखी या वर्तमान में जब भी आप इस लेख को पढ़ रहे हे तब की वार्षिक टर्नओवर की लिमिट से अधिक नहीं हे तो सामान्यत आपको जी.एस.टी. की आवश्यकता नहीं होगी।
क्या छोटा बिज़नेस बिना जी.एस.टी. के चल सकता हे?
जैसा की अभी उप्पर हमने क्लियर किया हे आपकी वार्षिक टर्नओवर से ही इस बात का निर्धारण होगा की आपको जी.एस.टी. लेना चाहिए या नहीं इसलिए यहाँ यह बात साफ हे की छोटा बिज़नेस यदि जी.एस.टी. की वार्षिक टर्नओवर लिमिट से निचे हे तो ऐसे बिज़नेस के लिए जी.एस.टी. लेना अनिवार्य नहीं होता हे।
जी.एस.टी. लेने के फायदे
1 - यदि आप ऑनलाइन बिज़नेस को बढ़ाना चाहते हे तो अपने बिज़नेस को जी.एस.टी. रजिस्टर्ड करने के बाद आपको मार्केटप्लेस वेबसाइट जैसे अमेज़न, फ्लिपकार्ट इत्यादि में आपके प्रोडक्ट बेचने का मौका मिल जायेगा। जिससे आपके प्रोडक्ट घर बैठे ही पुरे भारत देश में कही भी बेचे जा सकते हे। जितने ज्यादा लोगो तक आपका प्रोडक्ट जायेगा उतना ही आपके प्रोडक्ट बिकने के अवसर बढ़ जायेंगे।
2 - B2B क्लाइंट्स के साथ आप आसानी से डील कर पाएंगे क्युकी उन्हें इनपुट क्रेडिट जिनकी हमने इस लेख में उप्पर ही बात की हे उन्हें वापस लेने के लिए जी.एस.टी. बिल की आवश्यकता होती हे।
3 - आप खुद भी अपने बिज़नेस के लिए ख़रीदे माल पर B2B बिल के फायदे ले पाएंगे।
4 - GST लेने से आपका बिज़नेस प्रोफेशनल लगने लगता हे जिससे आपके बिज़नेस को एक नयी पहचान मिलती हे और कस्टमर का यकीं आपके बिज़नेस पर बढ़ता हे। GST भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होता हे और कई वेरिफिकेशन प्रोसेस से गुजरने के बाद आपको GST नंबर मिलता हे जिससे आपके बिज़नेस को भारत सरकार की मान्यता भी प्राप्त होती हे।
5 - GST लेने पर GST डिपार्टमेंट की तरफ से आपके बिज़नेस एड्रेस जो भी आपने अपने GST रजिस्ट्रेशन फॉर्म में भरा हे उस पर GST डिपार्टमेंट का एक औपचारिक लेटर भेजा जाता हे यदि वो लेटर आपके द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता हे तो आपका GST रजिस्ट्रेशन कैंसिल होने जैसी समस्या हो सकती हे, इसलिए GST रजिस्ट्रेशन में दिया गया आपका एड्रेस आपके बिज़नेस एड्रेस के सही होने को प्रमाणित करता हे। जिससे कस्टमर के साथ धोखाधड़ी भी नहीं हो सकती।
6 - GST की ऑफिसियल वेबसाइट पर GST रजिस्टरड व्यक्ति की पूरी जानकारी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रहती हे जिसको की कोई भी व्यक्ति या कस्टमर माल खरीदने से पहले चेक कर ले तो ऑनलाइन प्रोडक्ट के लेन-देन में होने वाली धोखाधड़ी से खुद को बचा सकते हे।
ऐसा नहीं हे की GST लेने के सिर्फ फायदे ही फायदे हे कुछ नुकसान भी हे इसलिए यदि आप बिज़नेस के शुरुवाती दिनों में हे तो आपके लिए जानना सबसे ज्यादा जरुरी हे।
जी.एस.टी. में हो सकने वाले नुकसान
1 - हर महीने या हर तीन महीने में जैसा भी आपका GST रिटर्न साईकल होता हे उसके अनुसार आपको GST रिटर्न फाइल करना होगा यहाँ तक की आपकी कोई सेल नहीं भी हुई तब भी आपको नील रिटर्न तो फाइल करना ही होगा। यदि आप इसमें चूक करते हे तो आप पर पेनल्टी लगेगी।
2 - रिटर्न फाइल करना यदि आपको आता हे रिटर्न फाइल आप खुद कर सकते हे परन्तु यदि नहीं आता तो इसके लिए आपको किसी एक्सपर्ट की आवश्यकता होगी जिसके लिए आपको एक्सपर्ट को हर बार रिटर्न फाइल करते टाइम पेमेंट देना होगा।
3 - आपको अपने बिज़नेस से समन्धित सारे रिकॉर्ड सही से मेन्टेन रखने होंगे। रिकॉर्ड में की गयी हेरा फेरी GST रिटर्न के माध्यम से पकड़ी जा सकती हे इसलिए रेकॉर्ड को मेन्टेन करने में चूक नहीं करनी चाहिए।
4 - यदि आपसे रिटर्न फाइल करने में गलती होती हे या फिर आपसे देरी होती हे तो आप पर उस गलती का जुर्माना या लेट फीस का हर्जाना लग सकता हे।
5 - बिज़नेस के कामकाजी बोझ के साथ साथ आपको GST के बेसिक नियमो की जानकारी एवं GST समय समय पर भरते रहने की जिम्मेदारी का निर्वाहन भी करना पड़ेगा।
जी.एस.टी. रजिस्ट्रेशन के लिए कोनसे डाक्यूमेंट्स चाहिए
जी.एस.टी. रजिस्ट्रेशन के लिए आपको निम्नलिखित डाक्यूमेंट्स चाहिए
PAN Card
Aadhaar Card
Mobile Number
Email ID
Bank Account Details
Business Address Proof
Light Bill
Udhyam Registration Certificate (Depends on case)
Property Registration (Depends on case)
NOC (Depends on case)
Digital Signature (Depends on case)
Passport Size Photo
आमतौर पर आधार ऑथेंटिकेशन सफल हो जाने पर 3 से 7 दिन तक में GST रजिस्ट्रेशन हो जाता हे। अधिकतर समय वेरिफिकेशन प्रोसेस की वजह से अटका रहता हे। इसलिए पूरी तरह से GST रजिस्ट्रेशन में लगभग 15 दिन मान कर चलना ही उत्तम रहता हे।
Note : - यदि आप चाहते हे आपके बिज़नेस के लिए हम GST रजिस्ट्रेशन की सर्विस प्रोवाइड करे तो आप हमसे लाइव चैट ऑप्शन के माध्यम से संपर्क करके हमारी फीस का भुगतान कर GST रजिस्ट्रेशन सर्विस हमसे प्राप्त कर सकते हे।



